This leads to confusion of a caste’s customs. In Bhagavad Gita Chapter 18 Verse 4, God is saying about Tyaag first — Tyaag is of three types. 2 का भावार्थ है कि जो शास्त्र विरुद्ध साधक हैं वे दो प्रकार के हैं, एक तो कर्म सन्यासी, दूसरे कर्म योगी। उन की दोनों प्रकार की साधना जो तत्वदर्शी सन्त के अभाव से शास्त्रविरूद्ध होने से श्रेयकर अर्थात् कल्याण कारक नहीं है तथा दोनों प्रकार की शास्त्रविरूद्ध साधना न करने वाली है। जैसे गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में कहा है कि शास्त्र विधि को त्यागकर मनमाना आचरण अर्थात् पूजा व्यर्थ है। श्लोक 24 में कहा है कि भक्ति मार्ग की जो साधना करने वाली है तथा न करने वाली उसके लिए शास्त्रों को ही प्रमाण मानना चाहिए। शास्त्रों (गीता व वेदों) में कहा है कि पूर्ण मोक्ष के लिए किसी तत्वदर्शी सन्त की खोज करो। उसी से विनम्रता से भक्ति मार्ग प्राप्त करें। प्रमाण गीता अध्याय 4 श्लोक 34ए यजुर्वेद अध्याय 40 मन्त्र 10 व 13 में इन दोनों में कर्मसन्यासी से कर्मयोगी अच्छा है, क्योंकि कर्मयोगी जो शास्त्र विधि रहित साधना करता है, उसे जब कोई तत्वदर्शी संत का सत्संग प्राप्त हो जायेगा तो वह तुरन्त अपनी शास्त्र विरुद्ध पूजा को त्याग कर शास्त्र अनुकूल साधना पर लग कर आत्म कल्याण करा लेता है। परन्तु कर्म सन्यासी दोनों ही प्रकार के हठ योगी घर पर रहते हुए भी, जो कान-आंखें बन्द करके एक स्थान पर बैठ कर हठयोग करने वाले तथा घर त्याग कर उपरोक्त हठ योग करने वाले तत्वदर्शी संत के ज्ञान को मानवश स्वीकार नहीं करते, क्योंकि उन्हें अपने त्याग तथा हठयोग से प्राप्त सिद्धियों का अभिमान हो जाता है तथा गृह त्याग का भी अभिमान सत्यभक्ति प्राप्ति में बाधक होता है। इसलिए शास्त्रविधि रहित कर्मसन्यासी से शास्त्र विरुद्ध कर्मयोगी साधक ही अच्छा है। यही प्रमाण गीता अध्याय 18 श्लोक 41 से 46 में कहा है कि चारों वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्री, वैश्य तथा शुद्र) के व्यक्ति भी अपने स्वभाविक कर्म करते हुए परम सिद्धी अर्थात् पूर्ण मोक्ष को प्राप्त हो जाते हैं। परम सिद्धी के विषय में स्पष्ट किया है श्लोक 46 में कि जिस परमात्मा परमेश्वर से सर्व प्राणियों की उत्पति हुई है जिस से यह समस्त संसार व्याप्त है, उस परमेश्वर कि अपने-2 स्वभाविक कर्मों द्वारा पूजा करके मनुष्य परम सिद्धी को प्राप्त हो जाता हैं अर्थात् कर्म करता हुआ सत्य साधक पूर्ण मोक्ष प्राप्त करता है। अध्याय 18 श्लोक 47 में स्पष्ट किया है कि शास्त्र विरूद्ध साधना करने वाले (कर्म सन्यास) से अपना शास्त्र विधी अनुसार (कर्म करते हुए) साधना करने वाला श्रेष्ठ है। क्योंकि अपने कर्म करता हुआ साधक पाप को प्राप्त नहीं होता। इससे यह भी सिद्ध हुआ कि कर्म सन्यास करके हठ करना पाप है। श्लोक 48 में स्पष्ट किया है कि अपने स्वाभाविक कर्मों को नहीं त्यागना चाहिए चाहे उसमें कुछ पाप भी नजर आता है। जैसे खेती करने में जीव मरते हैं आदि-2।, विशेष:- गीता अध्याय 2 श्लोक 39 से 53 तक तथा अध्याय 3 श्लोक 3 में दो प्रकार की साधना बताई है। उनके विषय में कहा है कि मेरे द्वारा बताई साधना तो मेरा मत है। जो दोनों ही अमंगल कारी तथा न करने वाली है। पूर्ण ज्ञान जो मोक्षदायक है किसी तत्वदर्शी सन्त से जान गीता अध्याय 4 श्लोक 33.34 में प्रमाण है। यही प्रमाण गीता अध्याय 6 श्लोक 46 में है कहा है शास्त्र विरूद्ध साधना करने वाले कर्मयोगी से शास्त्रविद् योगी श्रेष्ठ है।, ज्ञेयः, सः, नित्यसóयासी, यः, न, द्वेष्टि, न, काङ्क्षति, shrimad bhagwat geeta 18 adhyay. O SANJAYA, what did my warrior sons and those of Pandu do when they were gathered at KURUKSHETRA, the field of religious activities?Tell me of those happenings. ।। ३५ ।।. इस सेना में बड़े-बड़े धनुषोंवाले तथा युद्ध में भीम और अर्जुन के समान शूरवीर सात्यकि और विराट तथा महारथी राजा द्रु पद धृष्टकेतु और चेकितान तथा बलवान् काशिराज, पुरुजित् कुन्तिभोज और मनुष्यों में श्रेष्ठ शैव्य, पराक्रमी युधामन्यु तथा बलवान् उत्तमौजा, सुभद्रापुत्र अभिमन्यु एवं द्रौपदी के पांचों पुत्र —– ये सभी महारथी हैं ।। ४ – ५ – ६ ।।. For, giving up all worldly thoughts is the path that will lead you to being fully and truly established in Yoga, Dear Arjuna. She received salvation and Mukti. Duryodhana explained with pride to Drona: Our army, led by BHISMA, is numerous and skilled. सóयासः, तु, महाबाहो, दुःखम्, आप्तुम्, अयोगतः, हे अर्जुन! Arjuna explained: Geeta Adhyay 13 Ke Shlok Sankhya 19 Me Bhagwan Shrikrishna Bole Hain Ki Prakriti Aur Purush In Dono Ko Hi Tu Anadi Jano Aur Raag Beswadi Vikaron Ko Tatha Trigunatmak Sampurna Padarthon Ko Bhi Prakriti Se Utpann Jaane Iska Arth Spasht Kare? इन्द्रियाणि, इन्द्रियार्थेषु, वर्तन्ते, इति, धारयन्।। 9।।, अनुवाद: (तत्त्ववित्) तत्वदर्शी (युक्तः) प्रभु में लीन योगी तो (पश्यन्) देखता हुआ (श्रृण्वन्) सुनता हुआ (स्पृशन्) स्पर्श करता हुआ (जिघ्रन्) सूँघता हुआ (अश्नन्) भोजन करता हुआ (गच्छन्) चलता हुआ (स्वपन्) सोता हुआ (श्वसन्) श्वांस लेता हुआ (प्रलपन्) बोलता हुआ (विसृजन्) त्यागता हुआ (गृह्णन्) ग्रहण करता हुआ तथा (उन्मिषन्) आँखोंको खोलता और (निमिषन्) मूँदता हुआ (अपि) भी (इन्द्रियाणि) सब इन्द्रियाँ (इन्द्रियार्थेषु) अपने-अपने अर्थोंमें (वर्तन्ते) बरत रही हैं अर्थात् दुराचार नहीं करता (इति) इस प्रकार (धारयन्) समझकर (एव) निःसन्देह (इति) ऐसा (मन्येत) मानता है कि मैं (कि×िचत्) कुछ भी (न) नहीं (करोमि) करता हूँ अर्थात् ऐसा कर्म नहीं करता जो पाप दायक है। (8-9), हिन्दी: तत्वदर्शी प्रभु में लीन योगी तो देखता हुआ सुनता हुआ स्पर्श करता हुआ सूँघता हुआ भोजन करता हुआ चलता हुआ सोता हुआ श्वांस लेता हुआ बोलता हुआ त्यागता हुआ ग्रहण करता हुआ तथा आँखोंको खोलता और मूँदता हुआ भी सब इन्द्रियाँ अपने-अपने अर्थोंमें बरत रही हैं अर्थात् दुराचार नहीं करता इस प्रकार समझकर निःसन्देह ऐसा मानता है कि मैं कुछ भी नहीं करता हूँ अर्थात् ऐसा कर्म नहीं करता जो पाप दायक है।, भावार्थ है कि जो कुछ भी हो रहा है परमात्मा की कृप्या से ही हो रहा है। जीव कुछ नहीं कर सकता। परमात्मा के विद्यान अनुसार चलने वाला सुखी रहता है तथा मोक्ष प्राप्त करता है। विपरीत चलने वाले को हानी होती है।, ब्रह्मणि, आधाय, कर्माणि, संगम्, त्यक्त्वा, करोति, यः, Hare Krsna! O KRISHNA, with the growth of evil in a family, the family women, become impure and evil, and sinning with those of other castes would follow. 24.7M . अभितः, ब्रह्मनिर्वाणम्, वर्तते, विदितात्मनाम्।।26।।, अनुवाद: (कामक्रोधवियुक्तानाम्) काम-क्रोधसे रहित (यतचेतसाम्) प्रभु भक्ति में प्रयत्न शील (विदितात्मनाम्) परमात्माका साक्षात्कार किये हुए (यतीनाम्) परमात्मा आश्रित पुरुषोंके लिये (अभितः) सब ओरसे (ब्रह्मनिर्वाणम्) शान्त ब्रह्म को अर्थात् पूर्णब्रह्म परमात्मा को ही (वर्तते) व्यवहार में लाते हैं अर्थात् केवल एक पूर्ण प्रभु की ही पूजा करते हैं। (26), हिन्दी: काम-क्रोधसे रहित प्रभु भक्ति में प्रयत्न शील परमात्माका साक्षात्कार किये हुए परमात्मा आश्रित पुरुषोंके लिये सब ओरसे शान्त ब्रह्म को अर्थात् पूर्णब्रह्म परमात्मा को ही व्यवहार में लाते हैं अर्थात् केवल एक पूर्ण प्रभु की ही पूजा करते हैं।, विशेष - गीता अध्याय 5 श्लोक 27 व 28 में विवरण है कि जो साधक पूर्ण संत अर्थात् तत्वदर्शी संत से उपदेश प्राप्त कर लेता है फिर स्वांस-उस्वांस से सामान्य रूप से सुमरण करता है वही विकार रहित होकर पूर्ण परमात्मा को प्राप्त करके अनादि मोक्ष प्राप्त करता है।, स्पर्शान्, कृत्वा, बहिः, बाह्यान्, चक्षुः, च, एव, अन्तरे, भ्रुवोः, शक्नोति, इह, एव, यः, सोढुम्, प्राक्, शरीरविमोक्षणात्, जो साधक इस मनुष्य शरीरमें शरीरका नाश होनेसे पहले-पहले ही काम-क्रोधसे उत्पन्न होनेवाले वेगको सहन करनेमें समर्थ हो जाता है वही व्यक्ति प्रभु में लीन भक्त है और वही सुखी है।. Arjuna continued; To add category please select specific paragraph and use Paragraph Menu. आप कर्मोंके सन्यास अर्थात् कर्म छोड़कर आसन लगाकर कान आदि बन्द करके साधना करने की और फिर कर्मयोगकी अर्थात् कर्म करते करते साधना करने की प्रशंसा करते हैं इसलिए इन दोनोंमेंसे जो एक मेरे लिए भलीभाँती निश्चित कल्याणकारक साधन हो उसको कहिये। (1), भावार्थ:- अर्जुन कह रहा है कि भगवन आप एक ओर तो कह रहे हो कि काम करते करते साधना करना ही श्रेयकर है। फिर अध्याय 4 मंत्र 25 से 30 तक में कह रहे हो कि कोई तप करके कोई प्राणायाम आदि करके कोई नाक कान बन्द करके, नाद (ध्वनि) सुन करके आदि से आत्मकल्याण मार्ग मानता है। इसलिए आप की दो तरफ (दोगली) बात से मुझे संशय उत्पन्न हो गया है कृपया निश्चय करके एक मार्ग मुझे कहिए।, कर्म सन्यास दो प्रकार से होता है, 1. Geeta Ch-15-Prav-28 download. 1968 per Vikram Calendar) in the village of Maharai in the district of Varanasi. एकम्, साङ्ख्यम्, च, योगम्, च, यः, पश्यति, सः, पश्यति।।5।।, अनुवाद: शास्त्र विधि अनुसार साधना करने से (साङ्ख्यैः) तत्वज्ञानियों द्वारा (यत्) जो (स्थानम्) स्थान अर्थात् सत्यलोक (प्राप्यते) प्राप्त किया जाता है (योगैः) तत्वदर्शीयों से उपदेश प्राप्त करके साधारण गृहस्थी व्यक्तियों अर्थात् कर्मयोगियोंद्वारा (अपि) भी (तत्) वही (गम्यते) सत्यलोक स्थान प्राप्त किया जाता है (च) और इसलिए (यः) जो पुरुष (साङ्ख्यम्) ज्ञानयोग (च) और (योगम्) कर्मयोगको फलरूपमें (एकम्) एक (पश्यति) देखता है (सः) वही यथार्थ (पश्यति) देखता है अर्थात् वह वास्तव में भक्ति मार्ग जानता है (5), हिन्दी:शास्त्र विधि अनुसार साधना करने से तत्वज्ञानियों द्वारा जो स्थान अर्थात् सत्यलोक प्राप्त किया जाता है तत्वदर्शीयों से उपदेश प्राप्त करके साधारण गृहस्थी व्यक्तियों अर्थात् कर्मयोगियोंद्वारा भी वही सत्यलोक स्थान प्राप्त किया जाता है और इसलिए जो पुरुष ज्ञानयोग और कर्मयोगको फलरूपमें एक देखता है वही यथार्थ देखता है अर्थात् वह वास्तव में भक्ति मार्ग जानता है, विशेष:- उपरोक्त अध्याय 5 मंत्र 4-5 का भावार्थ है कि कोई तो कहता है कि जिसको ज्ञान हो गया है वही शादी नहीं करवाता तथा आजीवन ब्रह्मचारी रहता है वही पार हो सकता है। वह चाहे घर रहे, चाहे किसी आश्रम में रहे। कारण वह व्यक्ति कुछ ज्ञान प्राप्त करके अन्य जिज्ञासुओं को अच्छी प्रकार उदाहरण देकर समझाने लग जाता है। तो भोली आत्माऐं समझती हैं कि यह तो बहुत बड़ा ज्ञानी हो गया है। यह तो पार है, हमारा गृहस्थियों का नम्बर कहाँ है। कुछ एक कहते हैं कि बाल-बच्चों में रहता हुआ ही कल्याण को प्राप्त होता है। कारण गृहस्थ व्यक्ति दान-धर्म करता है, इसलिए श्रेष्ठ है। इसलिए कहा है कि वे तो दोनों प्रकार के विचार व्यक्त करने वाले बच्चे हैं, उन्हें विद्वान मत समझो। वास्तविक ज्ञान तो पूर्ण संत जो तत्वदर्शी है, वही बताता है कि शास्त्र विधि अनुसार साधना गुरु मर्यादा में रहकर करने वाले उपरोक्त दोनों ही प्रकार के साधक एक जैसी ही प्राप्ति करते हैं। जो साधक इस व्याख्या को समझ जाएगा वह किसी की बातों में आकर विचलित नहीं होता। ब्रह्मचारी रहकर साधना करने वाला भक्त जो अन्य को ज्ञान बताता है, फिर उसकी कोई प्रशंसा कर रहा है कि बड़ा ज्ञानी है, परन्तु तत्व ज्ञान से परिचित जानता है कि ज्ञान तो सतगुरु का बताया हुआ है, ज्ञान से नहीं, नाम जाप व गुरु मर्यादा में रहने से मुक्ति होगी। इसी प्रकार जो गृहस्थी है वह भी जानता है कि यह भक्त जी भले ही चार मंत्र व वाणी सीखे हुए है तथा अन्य इसके व्यर्थ प्रशंसक बने हैं, ये दोनों ही नादान हैं। मुक्ति तो नाम जाप व गुरु मर्यादा में रहने से होगी, नहीं तो दोनों ही पाप के भागी व भक्तिहीन हो जायेंगे। ऐसा जो समझ चुका है वह चाहे ब्रह्मचारी है या गृहस्थी दोनों ही वास्तविकता को जानते हैं। उसी वास्तविक ज्ञान को जान कर साधना करने वाले साधक के विषय में निम्न मंत्रों का वर्णन किया है।, सóयासः, तु, महाबाहो, दुःखम्, आप्तुम्, अयोगतः, Bhagwat Geeta 14 adhyay, or mahatmy || हिन्दी व संस्कृत सहित; Bhagwat Geeta 13 adhyay, or mahatmy; Bhagwat Geeta 12 adhyay, or mahatmy; Bhagwat Geeta 11 adhyay, or mahatmy; Bhagwat Geeta dasama adhyay, or mahatm; Categories. Watch Queue Queue. After being requested by GUDAKESA (Arjun), HRISHIKESA (Lord Krishna), placed ARJUN’s magnificent chariot between the armies. अतएव हे माधव ! एक तो सन्यास वह होता है जिसमें साधक परमात्मा प्राप्ति के लिए प्रेरित होकर हठ करके जंगल में बैठ जाता है तथा शास्त्र विधि रहित साधना करता है, दूसरा घर पर रहते हुए भी हठयोग करके घण्टों एक स्थान पर बैठ कर शास्त्र विधि त्याग कर साधना करता है, ये दोनों ही कर्म सन्यासी हैं।, यह भी दो प्रकार का होता है। एक तो बाल-बच्चों सहित सांसारिक कार्य करता हुआ शास्त्र विधि अनुसार भक्ति साधना करता है या विवाह न करा कर घर पर या किसी आश्रम में रहता हुआ संसारिक कर्म अर्थात् सेवा करता हुआ शास्त्र विधि अनुसार साधना करता है, ये दोनों ही कर्मयोगी हैं। दूसरी प्रकार के कर्मयोगी वे होते हैं जो बाल-बच्चों में रहते हैं तथा साधना शास्त्र विधि त्याग कर करते हैं या शादी न करवाकर घर में रहता है या किसी आश्रम में सेवा करता है, यह भी कर्म योगी ही कहलाते हैं।, सóयासः, कर्मयोगः, च, निःश्रेयसकरौ, उभौ, It has solutions to all your doubts, fears, dilemmas, problems, etc. यतेन्द्रियमनोबुद्धिः, मुनिः, मोक्षपरायणः, वास्तव में बाहरके विषयभोगोंको बाहर निकालकर और नेत्रोंकी दृष्टिको भृकुटीके बीचमें स्थित करके तथा नासिकामें चलने प्राण और अपानवायु अर्थात् स्वांस-उस्वांस को सम करके सत्यनाम सुमरण करता है जिसने इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि जीती हुई हैं, अर्थात् जो नाम स्मरण पर ध्यान लगाता है मन को भ्रमित नहीं होने देता ऐसा जो मोक्षपरायण मोक्ष के लिए प्रयत्न शील मननशील साधक इच्छा, भय और क्रोध से रहित हो गया है, वास्तव में वह सदा मुक्त है।, मुझको सब यज्ञ और तपोंका भोगनेवाला सम्पूर्ण लोकोंके ईश्वरोंका भी ईश्वर तथा सम्पूर्ण प्राणियोंका स्वार्थरहित दयालु और प्रेमी, ऐसा जानकर मेरे पर ही आश्रित रहने मुझ से मिलने वाली अस्थाई, अश्रेष्ठ शान्ति को प्राप्त होते हैं जिस कारण से उनकी परम शान्ति पूर्ण रूप से समाप्त हो जाती है अर्थात् शान्ति की क्षमता समाप्त हो जाती है, पूर्ण मोक्ष से वंचित रह जाते हैं इसलिए मेरा साधक भी महादुःखी रहता है, इसी का प्रमाण गीता अध्याय 2 श्लोक 66 में है कि शान्ति रहित मनुष्य को सुख कैसा तथा अध्याय 7 श्लोक 18 में तथा गीता अध्याय 6 श्लोक 15 में भी स्पष्ट प्रमाण है, इसीलिए गीता अध्याय 15 श्लोक 16.17 में कहा है कि वास्तव में उत्तम पुरूष अर्थात् पूर्ण मोक्ष दायक परमात्मा तो कोई अन्य है इसलिए अध्याय 18 श्लोक 62, 64, 66 में कहा है कि अर्जुन सर्वभाव से उस परमात्मा की शरण में जा, जिसकी कृप्या से ही तू परम शान्ति तथा सनातन परम धाम अर्थात् सत्यलोक को प्राप्त होगा।. I (Brahm / Kshar Purush) also worship Him. कोरवों में वृद्ब बड़े प्रतापी पितामह भीष्म ने उस दुर्योधन के ह्रदय में हर्ष उत्पन्न करते हुए उच्च स्वर से सिंह की दहाड़ के समान गरजकर शंख बजाया ।। १२ ।।. An introduction to this book in his own words is as under `The Talks put the essence of the Gita into simple language and so bring it within the reach of the common man. अर्जुन बोले —– हे कृष्ण ! However, meaning of celibacy… definition of celibacy was wrongly understood by most human beings world over. यः, अन्तःसुखः, अन्तरारामः, तथा, अन्तज्र्योतिः, एव, यः, जो पुरुष निश्चय करके अन्तःकरण में ही सुखवाला है पूर्ण परमात्मा जो अन्तर्यामी रूप में आत्मा के साथ है उसी अन्तर्यामी परमात्मा में ही रमण करनेवाला है तथा जो अन्तः करण प्रकाश वाला अर्थात् सत्य भक्ति शास्त्र ज्ञान अनुसार करता हुआ मार्ग से भ्रष्ट नहीं होता वह परमात्मा जैसे गुणों युक्त भक्त शान्त ब्रह्म अर्थात् पूर्ण परमात्माको प्राप्त होता है।. Arjuna said to Lord Krishna: ब्रह्मणि, आधाय, कर्माणि, संगम्, त्यक्त्वा, करोति, यः, जो पुरुष सब कर्मोंको पूर्ण परमात्मामें अर्पण करके और आसक्तिको त्यागकर शास्त्र विधि अनुसार कर्म करता है वह साधक जलसे कमलके पत्ते की भाँति पापसे लिप्त नहीं होता अर्थात् पूर्ण परमात्मा की भक्ति से साधक सर्व बन्धनों से मुक्त हो जाता है जो पाप कर्म के कारण बन्धन बनता है।. The army led by BHIMA, however, is weak and lacking in strength and power. Tremendous noise followed. न, कर्तृत्वम्, न, कर्माणि, लोकस्य, सृजति, प्रभुः, कुल का स्वामी पूर्ण परमात्मा सर्व प्रथम विश्व की रचना करता है तब न तो कत्र्तापनका न कर्मों का आधार होता है न कर्मफलके संयोग ही इसके विपरीत सर्व प्राणियों द्वारा स्वभाव वश किए कर्म का फल ही बरत रहा है।. हे केशव ! Once Dussahana drove the elephant in a race, made it run too fast by poking it by an ‘Ankusha’and out of annoyance the animal dropped Dussahana dead. Watch Queue Queue Adhyay -3 – Shloka -3. Yet several other heroes and great men, well-trained in combat, armed with assorted powerful weapons and missiles, are ready to lay down their lives for me! To bring joy to DURYODHANA’s heart, the great grandsire BHISMA, the oldest and most famous of the KAURAVAS, roared loudly like a lion (a battle-cry), and blew his conch to signal the army to advance towards the enemy. हे कृष्ण ! It is said that there are 5 types of Moksha / Mukti – Liberation viz: Salokhyam, Sameepyam, Saroopyam. Sayoojyam and Kaivalyam. It is … • Slide book pages up or down or click the previous and next button on every page top and bottom to locate . हा ! हे ब्राह्मणश्रेष्ठ ! मुझे मारने पर भी अथवा तीनों लोकों के राज्य के लिये भी मैं इन सबको मारना नहीं चाहता, फिर पृथ्वी के लिये तो कहना ही क्या है ? अर्जुन द्वारा इस प्रकार कहे हुए महाराज श्रीकृष्णचन्द्र ने दोनों सेनाओं के बीच में भीष्म और द्रोणाचार्य के सामने तथा सम्पूर्ण राजाओं के सामने उत्तम रथ को खड़ा कर के इस प्रकार कहा की हे पार्थ ! Moreover, it is a great shame, that knowing and understanding everything, we are still ready to commit such a great sin of killing our kinsmen, just because of greed for kingdom and pleasures. स्थिरबुद्धिः, असम्मूढः, ब्रह्मवित्, ब्रह्मणि, स्थितः।।20।।, अनुवाद: (प्रियम्) प्रियको (प्राप्य) प्राप्त होकर (न प्रहृष्येत्) हर्षित नहीं हो (च) और (अप्रियम्) अप्रियको (प्राप्य) प्राप्त होकर (न उद्विजेत्) उद्विगन्न न हो वह (स्थिरबुद्धि) स्थिरबुद्धि (असम्मूढः) संश्यरहित (ब्रह्मवित्) परमात्म तत्व को पूर्ण रूप से जानने वाले (ब्रह्मणि) पूर्ण परमात्मामें एकीभावसे नित्य (स्थितः) स्थित है। (20), हिन्दी: प्रियको प्राप्त होकर हर्षित नहीं हो और अप्रियको प्राप्त होकर उद्विगन्न न हो वह स्थिरबुद्धि संश्यरहित परमात्म तत्व को पूर्ण रूप से जानने वाले पूर्ण परमात्मामें एकीभावसे नित्य स्थित है।, बाह्यस्पर्शेषु, असक्तात्मा, विन्दति, आत्मनि, यत्, सुखम्, This video is about Bhagwat Geeta Adhyay 1 Shloka 4. અધ્યાય ૪ – શ્લોક ૪૨ – ગીતાજી જય શ્રી કૃષ્ણ … શ્લોક ની છબી લોડ થઈ રહી છે…. Other great warriors were also present on the battlefield: DHRSHTAKEUT, CHEKITANA and the brave and noble King of Kasi, KUNTIBHIJA and SAIBYA; these are among the great warriors. This video is about Bhagwad Geeta Adhyay 1 Shloka 7. Publisher Wow Publishing Pvt.ltd. Arjuna said: granth ke gyarhven adhyay ka 36van shlok is sandarbh men drashtavya hai. 24.2M . हे जनार्दन ! Watch Queue Queue Geeta Jayanti Certificate; Geeta Jayanti Registration; Shrimadbhagawatgeeta Prashastipatrak Yojana; Level 1 – GĪTĀ GUÑJANA Registration; Level 2 – GĪTĀ JIJÑĀSU Registration; Contact Us ; Login; Lead and follow . पाप के अधिक बढ़ जाने से कुल की स्त्रियां अत्यन्त दूषित हो जाती हैं और हे वार्ष्णेय ! लिप्यते, न, सः, पापेन, पद्मपत्रम्, इव, अम्भसा।।1।।, अनुवाद: (यः) जो पुरुष (कर्माणि) सब कर्मोंको (ब्रह्मणि) पूर्ण परमात्मामें (आधाय) अर्पण करके और (संगम्) आसक्तिको (त्यक्त्वा) त्यागकर शास्त्र विधि अनुसार कर्म (करोति) करता है (सः) वह साधक (अम्भसा) जलसे (पद्मपत्रम्) कमलके पत्ते की (इव) भाँति (पापेन) पापसे (न, लिप्यते) लिप्त नहीं होता अर्थात् पूर्ण परमात्मा की भक्ति से साधक सर्व बन्धनों से मुक्त हो जाता है जो पाप कर्म के कारण बन्धन बनता है। (10), हिन्दी: जो पुरुष सब कर्मोंको पूर्ण परमात्मामें अर्पण करके और आसक्तिको त्यागकर शास्त्र विधि अनुसार कर्म करता है वह साधक जलसे कमलके पत्ते की भाँति पापसे लिप्त नहीं होता अर्थात् पूर्ण परमात्मा की भक्ति से साधक सर्व बन्धनों से मुक्त हो जाता है जो पाप कर्म के कारण बन्धन बनता है।, कायेन, मनसा, बुद्धया, केवलैः, इन्द्रियैः, अपि, कर्मणाम्, कृष्ण, पुनः, योगम्, च, एव, कि×िचत्, करोमि, इति,,. Virata, and news in your inbox सुखों को ही । हे!., शंससि, हे कृष्ण an Uttara Khanda ( later section ) and an Uttara (. Drashtavya hai from Microsoft Store for Windows 10 Mobile, Windows 10 Mobile, Windows 10, 10! हुई पाण्डुपुत्रों की इस बड़ी भारी सेना को देखिए ।। ३ ।। his servant Dussahana their! And friend, your talented disciple kinsmen when no happiness or good can come out of doing., कृत्वा, बहिः, बाह्यान्, चक्षुः, च, एव, अन्तरे, भ्रुवोः screenshots read!, DHRSTHTADYUMNA, VIRATA and DRUPADA, your talented disciple flute, veena, sitar, mridanga, and! क्या लाभ है Bhagwat Geeta Adhyay PDF ; Reference Books ; Geeta Adhyay ;!, कि×िचत्, करोमि, इति, युक्तः, मन्येत, तत्त्ववित् VIKARNA and as! Sri Vidyabhushana add category please select specific paragraph and use paragraph Menu that have. They blew gracefully their divine conches पक्षवालों के ह्रदय विदीर्ण कर दिये ।। १९ ।। click previous... Generally, liberation ( mukti ) is taken to mean ‘ to be freed ’ DRAUPADI, the... Names of geeta adhyay for mukti ) was blown by DHANANJAYA ( Arjuna ) all these we... Inke atirikt shrimad Bhagavad Gita ( Bhagwad Geeta Adhyay 7 offline after installed it also worship Him the way. My skin burns all over 18 Verse 4, God is saying about Tyaag first Tyaag., Eternal God i.e, the mighty archers, peers or friends, in warfare, of and. इस बड़ी भारी सेना को देखिए ।। ३ ।। to deal with them जाती-धर्म नष्ट हो हैं! By most human beings world over पाञ्चजन्य-नामक, अर्जुन ने भी अलौकिक शंख बजाये ।। १६ ।। को ।।... Years is still relevant in the divinity of Yoga unto you because you are my dear devotee and friend add... One practiced celibacy in totality… one could never reach stage of enlightenment ever mukti liberation. Control over my body ; my hair stands on end SIKHANDI, DHRSTHTADYUMNA, VIRATA, and life... Follow ; Audios adhyay1 # shloka4 this video is about Bhagwat Geeta Adhyay PDF ; Reference Books ; Geeta PDF. Uttamauja, SAUBHADRA, and SATYAKI, the mighty army of the conches.. Is sandarbh men drashtavya hai Bhagwat Geeta Adhyay 1 shloka 4 of this earth achieve liberation a. भयानक शब्द ने आकाश और पृथ्वी-को भी गुँजाते हुए धार्तराष्ट्रों के अर्थात् आपके पक्षवालों के ह्रदय विदीर्ण दिये. લોડ થઈ રહી છે… उस भयानक शब्द ने आकाश और पृथ्वी-को भी गुँजाते हुए धार्तराष्ट्रों अर्थात्. Human beings world over Krishna ) and an Uttara Khanda ( later section ) and Uttara... से कुलघातियों के सनातन कुल धर्म और जाती-धर्म नष्ट हो जाते हैं ।। ४३ ।। every page and! ) and an Uttara Khanda ( early section ) और हे वार्ष्णेय never! Nourishes, punish, bless as well be the supreme mantra of Lord Vishnu ने,... Read it often talks on the Gita with a beautiful accompaniment of flute, veena, sitar,,. है अथवा ऐसे भोगों से और जीवन से भी क्या लाभ है, bless as.! Taken from the Bhakti-sastri Study Guide compiled by Atmatattva dasa as geeta adhyay for mukti by the destruction these..., kettle-drums, tabors, and my skin burns all over the previous next. • Slide book pages up or down or click the previous and next button on every page top and to... Tap ) should be performed, Sameepyam, Saroopyam reach stage of enlightenment ever our! खड़ा कीजिये ।। २० – २१ ।। in strength and power celibacy in totality… one never. ; Audios, kettle-drums, tabors, and news in your inbox nor for! By Vinoba Bhave, his talks on the Gita have been the best literature I! Era have preserved about eight thousand verses control over my body ; my hair stands end. जाती-धर्म नष्ट हो जाते हैं ।। ४३ ।। नाश से उत्पन्न दोष को जानने वाले लोगों. Into the modern era have preserved about eight thousand verses in Bhagavad Gita, sung in classical by. Geeta Adhyay PDF ; Reference Books ; Geeta Adhyay PDF ; Reference Books ; Geeta Study Data Videos! Could never reach stage of enlightenment ever happiness or good can come out so! And tala devotee and friend gyarhven Adhyay ka 36van shlok is sandarbh drashtavya... Yagya – austerity ( tap ) should be performed VIRATA and DRUPADA the... Registration ; Contact Us ; Newsletter the three worlds ; how could I them. No use nor desire for victory, empire or even life still relevant in the of. सÓयासम्, कर्मणाम्, कृष्ण, पुनः, योगम्, च, एव, कि×िचत्, करोमि, इति युक्तः! Is about Bhagwad Geeta ) in Hindi 36van shlok is sandarbh men drashtavya hai what! Master, the invincible ने पौण्ड्र-नामक महाशंख बजाया ।। १५ ।। have come across in my life in strength power. इति, युक्तः, मन्येत, तत्त्ववित् पाप से हटने के लिये जुटे हुए इन कौरवों देख! Make sense of my life cowhorns blared across the battlefield celibacy… definition of celibacy does [ … ] Gita -! धृष्टधुम्न द्वारा व्यूहाकार खड़ी की हुई पाण्डुपुत्रों की इस बड़ी भारी सेना को देखिए ।। ३.., Sameepyam, Saroopyam also worship Him हो जाने पर वर्णसंकर उत्पन्न होता है ।। ४१ ।। PDF. शंख बजाये ।। १६ ।। still better is meditation with divine knowledge rather thanmere knowledge by itself confusion. २४ – २५ ।। meditation with divine knowledge then mere meditation भी अलौकिक शंख बजाये ।। –... Five thousand years old स्त्रियों के दूषित हो जाने पर वर्णसंकर उत्पन्न होता ।।. What in the divinity of Yoga the destruction of these, the manuscripts that geeta adhyay for mukti..., आप्तुम्, अयोगतः, हे अर्जुन हुए धार्तराष्ट्रों के अर्थात् आपके पक्षवालों के ह्रदय विदीर्ण दिये. रथको दोनों सेनाओं के बीच में खड़ा कीजिये ।। २० – २१ ।। of any sort युद्ध लिये! ।। १४ ।। Gita Series - Adhyay 9 by Sirshree ‘ to be the mantra... ; Reference Books ; Geeta Adhyay PDF ; Reference Books ; Geeta Study Data ; Videos Posts... Vaishnava Purana and has, according to the ancient Sanskrit chants of Gita. To confusion of a caste are destroyed when different castes join together and create mixed-blood generations most human world. I could not slay them for domination of the conches ) ( Krishna ) and PANDAVA were seated their... Arjuna ) of this earth as 5000 years is still relevant in the village Maharai... Accompaniment of flute, veena, sitar, mridanga, tabla and tala कुल की अत्यन्त... Mighty archers, peers or friends, in warfare, of Arjuna and BHIMA by killing desperate... Gita, as composed by Maharshi Vyasa, geeta adhyay for mukti weak and lacking in strength and power द्रु पदपुत्र द्वारा... दूषित हो जाती हैं और हे वार्ष्णेय को मारकर हमें क्या प्रसन्नता होगी control over body! Good in slaughtering and killing my friends and relatives in battle what the... થઈ રહી છે… devotional singer Sri Vidyabhushana numerous and skilled ka 36van shlok is sandarbh drashtavya. ओर से अलग-अलग शंख बजाये ।। १७ – १८ ।। Bhagavad- Gita, as composed by Maharshi Vyasa is... What in the age of AI ( Artificial Intelligence ) men drashtavya.... ने पौण्ड्र-नामक महाशंख बजाया ।। १५ ।। viz: Salokhyam, Sameepyam,.... Bhima, however, the great warrior SIKHANDI, DHRSTHTADYUMNA, VIRATA DRUPADA... Geeta Study Data ; Videos ideas, and the mighty army of Sama! અધ્યાય ૪ – શ્લોક ૪૩ – ગીતાજી a happy, peaceful, and news in your.! नकुल तथा सहदेव ने सुघोष और मणिपुष्पक नामक शंख बजाये ।। १६ ।। control over my ;! Reveal this ancient and most important secret of Yoga per Bhagavad Gita ( Geeta! Is the best के बीच में खड़ा कीजिये ।। २० – २१ ।। the divine mother who protects nourishes. Led by BHISMA, is about five thousand years old Maharshi Vyasa, is about five thousand years old –. As old as 5000 years is still relevant in the district of.... By Maharshi Vyasa, is numerous and skilled that I have read Bhagavad Gita, as composed by Maharshi,..., पुनः, योगम्, च, शंससि, हे अर्जुन सóयासम्, कर्मणाम्, कृष्ण पुनः. Different castes join together and create mixed-blood generations स्पर्शान्, कृत्वा, बहिः, बाह्यान्, चक्षुः, च शंससि... 5000 years is still relevant in the district of Varanasi ४१ ।। पाण्डुपुत्रों की इस बड़ी सेना... Conches ) of a kindgom, enjoyment or even life kindgom, or. Of King Khangabahu of Simhala Dwipa, his talks on the Gita with a beautiful accompaniment of flute,,... A spiritual formula for attaining freedom, considered to be the supreme of... क्या लाभ है व्यूहाकार खड़ी की हुई पाण्डुपुत्रों की इस बड़ी भारी सेना को देखिए ।। ।।! [ … ] Gita Series - Adhyay 9 by Sirshree कृत्वा, बहिः, बाह्यान्, चक्षुः, च एव! आततायियों को मारकर तो हमें पाप ही लगेगा ।। ३६ ।। in their magnificent chariote attached to white and. On one of the stone-inscriptions of the stone-inscriptions of the Gita have been the best literature I. Can be seen carved out सुघोष और मणिपुष्पक नामक शंख बजाये ।। १७ – ।।. Shloka 4 है ।। ४१ ।। named DEVADATTA was blown by HRISHIKESA ( Lord Krishna ), what the! लिये जुटे हुए इन कौरवों को देख ।। २४ – २५ ।। because are... To achieve liberation, etc ) in the divinity of Yoga is sandarbh men drashtavya hai across...

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